UPI यूज करने पर चार्ज! PM मोदी को लिखा गया लेटर, जानें पूरा मामला

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UPI यूज करने पर चार्ज! PM मोदी को लिखा गया लेटर, जानें पूरा मामला
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अभी तक UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) ट्रांजैक्शन को मुफ्त रखा है, लेकिन अब इसमें बदलाव की संभावना है। पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर जीरो MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

क्या है मामला?

PCI का कहना है कि UPI और रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर व्यापारियों से कोई शुल्क न लेने की नीति पर दोबारा विचार किया जाए। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि बड़े व्यापारियों से UPI ट्रांजैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मर्चेंट चार्ज लिया जाए, जबकि छोटे व्यापारियों को इससे छूट दी जाएगी।

MDR चार्ज क्या होता है?

MDR (Merchant Discount Rate) वह शुल्क है, जो बैंक, पेमेंट गेटवे और अन्य सेवा प्रदाताओं को डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए मिलता है। वर्तमान में सरकार ने UPI और RuPay कार्ड पर यह चार्ज खत्म कर रखा है, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला है।

UPI पर चार्ज लगने से क्या होगा असर?

  1. बड़े व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा – यदि सरकार बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करती है, तो वे यह शुल्क ग्राहकों से वसूल सकते हैं।
  2. UPI का उपयोग घट सकता है – यदि ग्राहक को अतिरिक्त चार्ज देना पड़ा, तो वे कैश ट्रांजैक्शन या अन्य पेमेंट विकल्प अपना सकते हैं।
  3. डिजिटल इंडिया को झटका लग सकता है – सरकार का लक्ष्य कैशलेस इकोनॉमी बनाना है, लेकिन चार्ज लागू होने से डिजिटल भुगतान का आकर्षण कम हो सकता है।

सरकार का क्या कहना है?

फिलहाल सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की योजना अभी विचाराधीन है और अंतिम फैसला जल्द लिया जा सकता है।

क्या आपको UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज देना होगा?

अगर सरकार चार्ज लागू करती है, तो यह केवल व्यापारियों के लिए होगा, आम ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अगर व्यापारी यह शुल्क ग्राहकों से वसूलते हैं, तो अप्रत्यक्ष रूप से आपको अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।



UPI को अभी तक मुफ्त और आसान डिजिटल भुगतान का साधन माना जाता रहा है। अगर इस पर चार्ज लगाया जाता है, तो इससे डिजिटल पेमेंट की बढ़ती रफ्तार पर असर पड़ सकता है। सरकार को इसे लेकर एक संतुलित नीति बनानी होगी, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन भी प्रभावित न हो और भुगतान सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिल सके।

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