नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी पार्टी धर्म के आधार पर कोई आरक्षण नहीं दे रही है। उन्होंने BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह खुद धर्म के आधार पर कानून बना रही है और इस मुद्दे को उठाकर अपने भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
क्या कहा मल्लिकार्जुन खड़गे ने?
- कांग्रेस धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दे रही।
- 1994 में लागू आरक्षण व्यवस्था को सभी सरकारों ने स्वीकार किया है।
- मुसलमानों को पहले भी कोई अलग आरक्षण नहीं दिया गया।
- BJP भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठा रही है।
कर्नाटक में आरक्षण का इतिहास
कर्नाटक में ओबीसी (OBC) आरक्षण के तहत कुछ मुस्लिम समुदायों को शामिल किया गया था, लेकिन यह आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर था। BJP सरकार ने 2023 में इस आरक्षण को हटाकर इसे वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय को देने का निर्णय लिया।
BJP बनाम कांग्रेस: आरक्षण पर राजनीति
- BJP का आरोप: कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
- कांग्रेस का जवाब: भाजपा झूठ फैला रही है और समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रही है।
- RSS का रुख: आरक्षण को आर्थिक आधार पर देने की वकालत।
क्या कहता है संविधान?
भारतीय संविधान के अनुसार, आरक्षण जाति और सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया जाता है, न कि धर्म के आधार पर। सुप्रीम कोर्ट भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि धर्म के नाम पर आरक्षण संवैधानिक नहीं है।
राजनीतिक प्रभाव और आगामी चुनाव
BJP और कांग्रेस के बीच यह मुद्दा लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एक बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है। जहां BJP इसे "संप्रदायिक आरक्षण" बताकर जनता को लुभाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय के तौर पर पेश करेगी।
मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान स्पष्ट करता है कि कांग्रेस धर्म के आधार पर आरक्षण के पक्ष में नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को इसका लाभ देना चाहती है। वहीं, BJP इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस पर हमला बोल रही है और इसे आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बना सकती है।